आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के याचिका को ख़ारिज कर दिया है।  यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की एकल सदस्यीय पीठ ने दिया। बता दें आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह खिलाफ हजरतगंज थाने में मुकदमा  दर्ज है। 

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अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लेने में कोई भी त्रुटि नहीं की गई है। हजरतगंज कोतवाली में सांसद के खिलाफ 12 अगस्त 2020 के कुछ विवादास्पद बयानों को लेकर एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में पुलिस ने उनके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।

इस पर एमपीएमएलए की स्पेशल कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए संजय सिंह को समन जारी किया था। सांसद ने उक्त मामले में निचली अदालत द्वारा संज्ञान लेने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अदालत ने कहा कि एमपी-एमएलए अदालत ने उनके (संजय सिंह) खिलाफ प्रस्तुत आरोपपत्र पर संज्ञान लेने में कोई विधिक त्रुटि नहीं की है। यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की एकल पीठ ने संजय सिंह की ओर से दायर याचिका पर पारित किया। आदेश 21 जनवरी को पारित किया गया था जो एक फरवरी को अदालत की वेबसाइट पर अपलोड हुआ। सिंह ने एमपी-एमएलए अदालत के गत चार दिसम्बर को पारित आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि उक्त आदेश विधि अनुकूल नहीं है, क् योंकि राज्य सरकार का अभियेाजन स्वीकृति का आदेश विधि सम्मत नहीं है।

याचिका का विरोध करते हुए शासकीय अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव ने तर्क दिया था कि अभियेाजन स्वीकृति आदेश में केवल सीआरपीसी की धारा-196 की जगह 197 लिख जाने मात्र से पूरी प्रकिया प्रभावहीन नहीं करार दी जा सकती है। उच्च न्यायालय ने शासकीय अधिवक्ता के तर्क को मंज़ूर करते हुए संजय सिंह की याचिका खारिज कर दी। बता दें कि 12 अगस्त 2020 को सांसद सिंह ने लखनऊ में एक पत्रकार वार्ता में कहा था कि यह सरकार एक जाति विशेष का पक्ष लेती है।

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उसके बाद उनके खिलाफ हजरतगंज थाने में भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने सात सितंबर 2020 को सांसद के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया और अभियोजन की स् वीकृति भी प्राप् त कर ली। इसके बाद एमपी-एमएलए अदालत ने चार दिसंबर, 2020 को आरोप पत्र का संज्ञान लेकर सांसद संजय सिंह को समन जारी कर दिया जिसको उन् होंने उच् च न् यायालय में चुनौती दी थी।